हाथ पैरों में कम्पन ( कपकपाहट) का घरेलू इलाज :-
हाथ और पैरो में कम्पन की समस्या समानता 40-50 की उम्र के बाद शुरू होते है परंतु शारीरिक कमजोरी एवं बीमारी के कारण ये किसी भी उम्र में देखा जा सकता है !
आखिर क्यों होती है हाथ व पैरो में कम्पन( कपकपाहट) ?
हाथ पैरों में कम्पन ( कपकपाहट) कई करने से हो सकता है शारीरिक कमजोरी, मानसिक डर, दिमाग का रोग, पार्किंसन रोग एवं उम्र बढ़ने के साथ साथ भी हो सकता है !
ऐसे में हाथ पैरों की अंगुलियों रोगी के ना चाहते हुए भी कांपती है एवं नियंत्रित नहीं होती,
ऐसी स्थिति में रोगी किसी भी चीज को या तो बिल्कुल नहीं पकड़ पता या फिर जो पकड़ता है उसमे ताकत नहीं लगती हैं!
कई सप्ताह बीत जाने के उपरांत या कई महीनो बाद जब लक्षण अधिक बढ़ जाते है एवं कपकपाहट अधिक बढ़ जाती है तब रोगी को एहसास होता है !
कभी कभी ये लक्षण लोगो में जैसे जैसे शुरू होता है वैसे ही स्वत: खत्म भी हो जाती है !
बहुत से रोगी के साथ ऐसा होता है उनको कपकापने के लक्षण हर समय दिखाई नहीं देता जब वो कोई काम कर रहे हो या लिखने का काम कर रहे हो या फिर कोई भरी काम कर रहे है इसी स्थिति में उनका यह लक्षण नजर आता है !
इस रोग का कारण हर इंसान में अलग अलग होता है, दिमाग के अंदर कुछ हिस्सों में एक न्यूरोट्रांसमीटर नाम का एक रसायन होता है यह रसायन हमारे पूरे शरीर या शरीर के किसी विशेष भाग की मासपेशियों को नियंत्रित करता है !
हाथ पैरों की उंगलियों का कांपना बच्चो में अधिक दस्त, स्त्रियों में गर्भावस्था के दौरान सर्दी लगने से या किसी कारण से चुल्लिका ग्रंथि निकाल देने से होता है !
इस रोग को लोग हल्के में लेते है एवं नजरंदाज कर देते है जो की बाद में बहुत नुकसानदायक होता सकता है, अन्यथा इस कोई भी लक्षण दिखने पर डॉक्टर से भी संपर्क करना
चाहिए !
अगर हाथ पैरों कांपन पार्किन्सन रोग के करना है तो निम्न लक्षण होंगे :-
आंखे खुली रहती है जैसे मानो व्यक्ति लगातार घूर रहा है या टकटकी लगाए हुए है !
चेहरे के सारे भाव खत्म हो जाए है या बिल्कुल नग्न हो जाते है बात करने के दौरान किसी भी तरह का भाव चेहरे पर उत्पन्न नहीं होता या बिल्कुल ही कम नजर आता है ( भाव जैसे हंसना रोना, गुस्सा करना, दर्द अवस्था, डर आदि) इसे कोई भी भाव !
भोजन को खाने में भी तकलीफ मालूम होती है एवं गले में भी अटकासा मालूम पड़ता है, गिलास पकड़ पानी पीने मे भी तकलीफ होती है या हिलने से पानी छलकता है!
आवाज बहुत धीमी हो जाती है एवं लड़खड़ाती है अर्थात सुस्पष्ट आवाज नहीं निकल पाती जो, साथ ही साथ सोचने समझने की ताकत पर भी इसका असर दिखता है, रोगी गुम शूम हो जाता है !
रोगी को रातों में नींद की कमी हो जाती है, वजन में भी कमी होती है, जल्दी थकान महसूस होती है पसीना अधिकाधिक आता है, खड़े होने पर अंधेरा छाने लगता है आंखो के आगे एवं पेशाब करते समय भी पेशाब रूक रूक कर होता है !
कुछ घरेलू नुस्खे और व्यायाम से भी आप इस रोग को दूर कर सकते है !
यदि हाथ पैरों में कपकपाहट होती है एवं ये समस्या आपको थोड़े समय या अधिक समय से है तो भी आप निम्न घरेलू उपाय से इसकी रोकथाम कर सकते है ( बचाव कर सकते है)
नींबू का रस एवं नारियल पानी का सेवन: - आप रोज पानी के नींबू का रस मिला कर पानी पीजिए , आप इसके साथ नारियल पानी का भी सेवन कर सकते है परंतु दोनो अलग अलग एक साथ नहीं, इसे से आपको इस समस्या में बहुत राहत मिलेगी !
दूध के था सोयाबीन / तिल :- आप दूध के साथ सोयाबीन को मिला कर खा सकते है या तो आप तिल को भी दूध के साथ मिलकर ले सकते है,
या फिर आप रोजाना बकरी के दूध का सेवन करे इस भी हाथ पैरों में होने वाली कपकपाहट को ठीक करने में मदद करती है !
लहसुन :-
अगर आप रोजाना लहसुन को पका कर खाते है एवं लहसुन को सरसों के तेल में अच्छे से गर्म कर के उस तेल से मालिश करते है तो भी आपको इस समस्या से राहत मिलती है !
सोंठ:
महारास्नादि में सोंठ का चूर्ण मिलाकर सुबह शाम पीने से भी इस रोग में आराम मिलता है !
दूध एवं लहसुन :
तीन से चार कली लहसुन की ले एवं उसको दूध में अच्छे से उबाल लें फिर 2 चम्मच एरंड का तेल मिलाकर प्रतिदिन रात्रि सोने से पूर्व पीए से भी रोगी को बहुत अधिक लाभ होता है !
गाय का घी:
एक गिलास दूध में एक से दो चम्मच गाय का घी मिलाकर अच्छे से उबाल लें फिर उसमें मिश्री मिला कर 3 से 4 ग्राम असगंध नागौरी का चूर्ण के साथ प्रति दिन सुबह शाम सेवन करने से भी रोगी को बहुत लाभ होता है !
तिल का तेल:
तिल के तेल से मालिश करने से एवं उसका सेवन करने से भी इस समस्या में राहत मिलती है !
कैमोमाइल टी :
कैमोमाइल टी , लैवेंडर टी आदि पीने से भी इस समस्या में कुछ सुधर मिलता है क्योंकि इनमें एंटीइंफ्लेमंटरी गुण इस समस्या को कम करता है !
इस समस्या से निदान के लिए आप , प्राणायाम करे ,
हाथ पैरों से समंधित व्यायाम करे,
दौड़ लगाए, स्विमिंग करे,
भरपूर नींद ले साथ ही साथ तनाव मुक्त रहे !
कैफिन एल्कोहल का उपयोग न करे क्योंकि इस तंत्रिक तंत्र की सक्रियता बढ़ जाती है जो की कपकपाहट का एक कारण बनती है, रिफाइनरी शुगर का भी उपयोग न करे इस इंदुली असंतुलित हो जाता है और यह भी एक कारण है कपकपाहट का !










Comments
Post a Comment