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पीरियड्स / मासिक धर्म में रक्तस्राव का काम होना क्या है?( What is light period?)

सर्वाइकल की समस्या एवं सर्वाइकल के दर्द लक्षण का घरेलू उपचार

 सर्वाइकल दर्द (सर्वाइकल की समस्या) का घरेलू समाधान !


सर्वाइकल एक ऐसी समस्या जो आज कल किसी भी उम्र के लोगो को हो रही है!

जिसका लक्षण आमतौर पर गर्दन में दर्द महसूस होता है, यह रोग गर्दन को प्रभावित करता है,

सर्वाइकल रोग गर्दन के हिस्से वाली रीढ़ की हड्डी के जोड़ो और डिस्क में समस्या होने से सर्वाइकल की समस्या उत्पन्न होती है!

डॉक्टरों के अनुसार सर्वाइवल का दर्द केवल गर्दन में नही रहता है ये दर्द धीरे धीरे शरीर के दूसरे हिस्से में भी फैल जाता है !

आमतौर पर गर्दन की हड्डी और रीढ़ की हड्डी के बीच नरम डिस्क, कुशनिंग प्रदान करते है, डिस्क डिहाइड्रेट और सिकुड़ने के रूप में होता है!



गर्दन के पीछे दर्द, सर के निचले हिस्से, कंधे, बांह, छाती में भी दर्द रहता है, गर्दन को हिलाने डुलाने पर दर्द मेहसूस होता है !

उठते बैठते समय आंखो के आगे अंधेरा छाना एवं चक्कर आने जैसी समस्या होती है , साथ ही साथ बैचेनी भी होने लगती हैं कई बार सांस लेने तक में परेशानी ( सांस का फूलना) महसूस होती है!

गर्दन से दर्द होता हुआ हाथों तक आ जाता है ( हाथों में दर्द महसूस होता है) पीठ में तेज दर्द भी होता है!

सर्वाइकल की समस्या के कारण हाथों बाजुओं और उंगलियों में काजोरी महसूस होना या सुन्न हो जाना जैसी समस्या के साथ साथ व्यक्ति को हाथ और पैरों में कमजोरी महसूस होती है जिस कारण व्यक्ति अपना संतुलन खो देना एवं उसको चलने में समस्या होने लगती है एवं गर्दन और कंधों में अकड़न आने लगती है !



सर्वाइकल क्यों होता है ? : - 

 सर्वाइकल होने के कई कारण हो सकते है एवं यह किसी को भी हो सकता है, यदि आप एक विद्यार्थी है तो भी ये हो सकता है, यदि आप एक ऑफिस में काम करते है तो भी, यदि आप रिटायर्ड है तो भी यह हो सकता है !

इसके होने की वह कई सारी है जैसे अधिक देर तक गर्दन झुका कर कार्य करना ,गर्दन झुका कर पढ़ाई करना, या फिर अधिक देर कंप्यूटर पर कर काम करना,

यदि आप अधिक वजन अपने सर पर उठाते है तो इसे भी आपको सर्वाइकल हो सकता है ,

बड़े और ऊंचे तकिए के उपयोग से भी सर्वाइकल होता है,

भारी वजन का जोर भी गर्दन पर पड़ने से सर्वाइकल हो सकता है,

गलत तरीके से उठने बैठने और सोने आदि से भी सर्वाइकल का खतरा हो सकता है !


सर्वाइकल से बचाव के घरेलू उपाय :-


हल्दी :-

हल्दी में इसे गुण तत्व पाए जाते है जो दर्द को प्राकृतिक तरीके से खत्म करने की क्षमता रखता है,

इसके लिए एक गिलास दूध में एक चम्मच से थोड़ा अधिक हल्दी डालकर उसको गर्म करे एवं हल्का ठंडा हो जाने के उपरांत लगभग एक चम्मच शहद मिलाकर इस को पीने से दर्द से छुटकारा मिलने के साथ साथ ब्लड सर्कुलेशन भी बिल्कुल ठीक रहता है !


तिल:-

तिल का तेल सर्वाइकल के दर्द से बहुत राहत दिलाता है,

तिल के तेल में भरपूर मात्रा में विटामिन डी, जिंक, फॉस्फोरस, कॉपर एवं मैग्नीशियम आदि के साथ इस कई गुण तत्व पाए जाते है जो सर्वाइकल के दर्द से छुटकारा दिलाते है !

इसके लिए तिल के तेल को हल्का गुनगुना करके रोजाना मालिश करनी चाहिए !


लहसुन:-

लहसुन एक ऐसा प्राकृतिक जिस में कई तरह के गुण तत्व पाए जाते हैं जैसे विटामिन सी, कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह तत्व आदि , जिसे रोजाना सुबह शाम दो कली भुनकर पानी के साथ खाने से एवं सरसों के तेल में 4 से 5 लहसुन की कली डालकर उस तेल को गर्म कर लें , इस तेल से मालिश करने से सर्वाइकल के दर्द में आराम मिलता है !


सर्वाइकल दर्द से छुटकारा पाने के लिए निम्न बातो का ध्यान रखें :-


अपनी गर्दन को जितना हो सके सीधा रखने का प्रयास करे !

 फर्श पर बिस्तरा लगा कर सोए या फिर तख्त पे सोए, मुलायम गद्दो पर ना सोए , खाट या फोल्डिंग पलंग के का उपयोग न करे !


अपने भोजन में कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर चीजों को शामिल करे !

स्मोकिंग, कैफीन वाले पदार्थो से दूरी बनाएं। 

रोजाना गर्दन से संबंधित व्यायाम जरूर करें।


पढ़ाई करते समय या ऑफिस/घर में कंप्यूटर पर काम करते वक्त गर्दन को अधिकार देर तक ना झुकाए , थोड़ी थोड़ी देर में ब्रेक दे ,उठ कर घूम ले या गर्दन एवं कंधे को घुमा ले !

सोते समय मोटे तकिए का उपयोग न करे एवं सही तरीके से सोए !

गर्दन में जहां दर्द वाले हो उस भाग में गर्म कपड़े से सिकाई करे या बर्फ से सिकाई करे इसे दर्द में बहुत अधिक आराम मिलता है



सर्वाइकल से बचाव के कुछ अन्य उपाय एवं व्यायाम :-

गर्दन और कंधे का व्यायाम रोजाना करे, गर्दन को एक बार दाहिने एक बारे बांए घुमाए, फिर एक बार नीचे एक बार उपर कर एवं गर्दन को धीरे धीरे गोल गुमाने का प्रयास कर!

हाथों को मोड़ कर कंधे को पकड़े और उसको घुमाए कम से कम 10 बार सीधा 10 बार उल्टा !



सर्वाइकल से बचाव के लिए कुछ योगासन :-




मत्स्यासन यह योग आसन हमारी रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने वो लचीलापन लाने में मदद करता है !




मकरासन यह आसन सर्वाइकल दर्द में कंधे और पीठ की दर्द के साथ साथ तनाव को कम करता है !




भुजंग आसन इस आसन को रोज करने से कंधे ,हाथ कोहनियों एवं पीठ आदि की अकड़न को दूर करने में सहायक है एवं इनको मजबूती प्रदान करता है!




धनुर आसन यह छाती ,गर्दन और कंधो की अकड़न को समाप्त करता है एवं रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है!



सूर्य नमस्कार आसन :-
इस आसन में 12 आसन चरण होते है जो निम्न है 
1. प्रणाम आसन
2. हस्तोत्तानासन
3. हस्तपाद आसन
4. अश्व संचालन आसन
5. दंडासन
6. अष्टांग नमस्कार
7. भुजंग आसन
8. पर्वत आसन
9. अश्वसंचालन आसन
10. हस्तपाद आसन
11. हस्तउत्थान आसन
12. ताड़ासन

जो व्यक्ति सर्वाइकल के दर्द से पीड़ित हो या जिसे गर्दन में दर्द , कंधे में दर्द हो तो उन के लिए यह योगासन बहुत उपयोगी है,
इन आसनों को करते समय सावधानी बरतनी चाहिए या किसी विशेषज्ञ के निर्देश का पालन करे !


















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